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भारत में वित्तिय बाज़ार

     

    Finance market



    Finance Market क्या है ? 

    वित्तिय बाजार दो प्रकार के होते हैं

    1) Money Market

    2) Capital Market


    Money Market (मुद्रा बाजार )

    वित्तिय बाजार का ऐसा भाग जहां कम समय के लिए लेनदेन होता है मुद्रा बाजार कहलाता है।

    यह मुद्रा बाजार अल्पकालिक पूंजी जरूरतों को पूरा करता है और यह अल्पकाल आमतौर पर 364 दिन तक होता है 

    इसमें RRB के अलावा सभी बैंक भाग ले सकते हैं ।


    मुद्रा बाजार के प्रपत्र (Money Market Instrument )


    ट्रेजरी बिल (Treasury bills / T bill )

    इन्हें छूट (Discount ) पर जारी किया जाता है ।

    इसका चलन 1986 में शुरू हुआ था ।

     इसे शून्य कूपन बंद प्रपत्र के नाम से भी जाना जाता है ।

    भारत सरकार के लिए इसे आरबीआई द्वारा जारी किया जाता है ।

    इसकी न्यूनतम राशि 25 हजार रुपये व अधिकतम कितनी भी हो सकती है तथा आरबीआई इसे जब चाहे तब बदल सकती है

    यह 91 दिन ,182 दिन , 364 दिन तक के लिए भी जारी किया जाता है


    बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 व NBFC लोकपाल योजना

    वाणिज्यिक पत्र (Comercial Paper )

    इन्हें भी छूट ( Discount )पर जारी किया जाता है।

     इसका चलन 1990 में शुरू हुआ था ।

     इन्हें तिजारती पत्र भी कहा जाता है । 

    इन्हें कंपनियों द्वारा जारी किया जाता है लेकिन वही कंपनी जो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो और उसकी कार्यकारी पूंजी 5 करोड़ रुपये से कम न हो ।

    इस की न्यूनतम राशि 5 लाख और उसके गुणक मूल्यवर्ग में जारी किया जाता है ।

     इनकी न्यूनतम अवधि 7 दिन व अधिकतम अवधि 364 दिन होती है ।


    जमा प्रमाण पत्र (Certificate of Deposites )

    इन्हें भी छूट पर जारी किया जाता है ।

    इनका चलन 1989 में शुरू हुआ था ।

     इसे बचत प्रमाण पत्र भी कहा जाता है ।

    इन्हें भारत के बैंकों द्वारा जारी किया जाता है।

     जमा प्रमाण पत्र की न्यूनतम राशि 1 लाख रुपये होनी चाहिए और उसके बाद एक लाख की गुणको में होनी चाहिए ।

    इनकी न्यूनतम अवधि 7 दिन व अधिकतम अवधि 364 दिन होती है ।


    नगद प्रबंधन बिल ( Cash Management Bill / CMB)

    इन्हें छूट पर जारी किया जाता है ।

     इनका चलन 2010 में शुरू हुआ ।

     यह सिर्फ 91 में दिन से कम अवधि के लिए ही जारी होता है ।

    CMB एक नकदी की कमी की भरपाई के लिए सरकार द्वारा जारी एक अल्पकालिक सुरक्षा  है ।


    कॉल मनी - 1 दिन के लिए निधियों का लेनदेन करना ।

    नोटिस मनी - 2 से 14 दिनों के लिए नीधियों का लेनदेन करना ।

    टर्म मनी - 15 दिनों से 1 वर्ष के लिए नीधियों का लेनदेन करना ।

    बेसल मानक

    बिल ऑफ एक्सचेंज - Bill of exchange

    इस में निम्न पार्टी शामिल होती है 

    उधार देने वाला  - Maker/Drawer/Payee/Seller

    उधार लेने वाला -Payer/Drawee/Buyer

    पेमेंट पाने वाला( Endorsee)  -Seller/Drawer


    बिल ऑफ एक्सचेंज एक लिखित दस्तावेज होता है । इसमें seller द्वारा buyer को एक निश्चित लिखी हुई राशि देने के लिए आदेश दिया जाता है । इसमें एक निश्चित राशि के साथ एक निश्चित तारीख लिखी होनी चाहिए । इसमें buyer व seller के हस्ताक्षर भी अनिवार्य है । इसमें बेनिफिसरी/ Endorsee का नाम लिखा हुआ होना चाहिए । वह कोई third person भी हो सकता है । जिसके पास यह बिल ऑफ एक्सचेंज होगा उसे पैसे मिल जाएंगे ।


    Combination

    1) Drawer - Drawee ✔️

    2) Drawer - Payee ✔️

    3) Drawee - Payee ✖️


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