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कैपिटल मार्केट क्या है ?

     

    Capital market kya hai


    कैपिटल मार्केट क्या है | capital market instruments

    Capital Market एक वित्तिय बाजार है जिसमें दीर्घकालिक ऋण (1 वर्ष से अधिक) या इक्विटी समर्थित प्रतिभूतियों को खरीदा और बेचा जाता है ।

     यह SEBI के देख रेख में आता है ।




                    Debt Financing

                Equity Financing

    कंपनी द्वारा किसी अन्य पार्टी के लिए दिए गए फंड को ऋण के रूप में जाना जाता है ।

    कंपनी द्वारा शेयर जारी करके उठाए गए फंड को इक्विटी के रूप में जाना जाता है ।

    इसमें ब्याज मिलता है ।

    इसमें या तो लाभ होता है या हानि ।

    इससे इक्विटी में परिवर्तित कर सकते हैं ।

    इसे डेट में परिवर्तित नहीं कर सकते ।

    इसमें मतदान का अधिकार नहीं होता ।

    इसमें मतदान का अधिकार होता है ।

    यह सावधि ऋण ,  डिवेंचर और बांड के रूप में हो सकता है ।

    यह केवल शेयर और स्टॉक के रूप में हो सकता है ।

    ऋण किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की ओर कंपनी द्वारा बकाया पैसे को दर्शाता है ।

    यह स्वामित्व वाली पूंजी को दर्शाता है ।


    फाइनेंस मार्केट

    Type of share Account


     1) Authorized Capital 

       यह वह अधिकतम पूंजी है तो शेयरधारको को कंपनी में निवेश करने के लिए अधिकृत है ।

    2) Issued Capital 

    Authorized capital  का वह भाग जिसे कोई कंपनी निवेशकों के लिए शेयर के रूप में जारी करती है  ।

    3) Subscribed Capital

    यह Issued Capital का वह भाग होता है जिसके लिए निवेशक subscribe करते हैं । यह दो प्रकार का होता है

    A ) Over Subscription - कुछ मामलों में जितने शेयर्स के लिए कंपनी ने application मंगवाए हैं उससे ज्यादा आ जाती है , इसे Over Subscription कहते हैं ।

    B ) Under subscriptions - यदि कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो पब्लिक उस शेयर के लिए कम अप्लाई करते हैं तो इसे Under subscriptions कहते हैं।


    4) Called up capital 

    यह face value का वह हिस्सा होता है जो पूंजी को कंपनी द्वारा निवेशकों से मांगी जाती है ।

    5) Paid up capital 

    यह Called up capital काबो हिस्सा है जो कि निवेशकों द्वारा कंपनी को pay किया जाता है ।


    Capital market दो प्रकार का होता है

    1) Primary market 

      कोई कंपनी जब पहली बार स्टॉक एक्सचेंज के जरिए अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच कर निवेशकों से रकम जुटाती है तो इसे आईपीओ (IPO) पेश करना पड़ता है । इसे प्राइमरी मार्केट कहते हैं । इसमें निम्न प्रकार के शेयर होते हैं - 


    1.IPO ( Initial Public Offering )

    जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को ऑफर करती है तो इसे आईपीओ कहते हैं । इस प्रक्रिया में कंपनियां अपने शेयर आम लोगों को ऑफर करती है ।

    2.FPO ( Follow On Public Offer ) 

    स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा निवेशकों को शेयर जारी करना एफपीओ कहलाता है ।

             3.Right Issue

    यह वह होता है जो एक सूचीबद्ध  कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को एक रिकॉर्ड तिथि के अनुसार नई प्रतिभूतियां जारी करने का प्रस्ताव देती है ।

    4.Private Placement

     निजी प्लेसमेंट प्रतिभूतियों का एक फंडिंग दौर है जो सार्वजनिक पेशकश के माध्यम से नहीं बल्कि एक निजी पेशकश के माध्यम से बेचा जाता है , ज्यादातर चुने हुए निवेशकों की एक छोटी संख्या के लिए ।

    5.Offer For Sale

    ओएफएस कंपनी के शेयर बेचने का एक तरीका होता है जिसमें लिस्टेड कंपनी के प्रमोटरों को अपनी मौजूदा शेरहोल्डिंग पारदर्शी तरीके से घटाने का मौका मिलता है ।

    2) Secondary Market 

     जब एक बार प्रतिभूतियों को प्राथमिक बाजार में जारी किया जाता है या स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाता है तो इनका कारोबार द्वितीयक बाजार में किया जा सकता है ।

    यह निवेशकों के लिए प्रतिभूतियों को खरीदने और बेचने का एक मंच है ।

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